महाभारत 5.139.50
स्नुषाश्च प्रस्नुषाश्चैव धृतराष्ट्रस्य संगताःहतेश्वरा हतसुता हतनाथाश्च केशव
snuṣāśca prasnuṣāścaiva dhṛtarāṣṭrasya saṃgatāḥhateśvarā hatasutā hatanāthāśca keśava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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