महाभारत 5.14.12
किमर्थमसि संप्राप्ता विज्ञातश्च कथं त्वहम्ततः सा कथयामास नहुषस्य विचेष्टितम्
kimarthamasi saṃprāptā vijñātaśca kathaṃ tvahamtataḥ sā kathayāmāsa nahuṣasya viceṣṭitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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