महाभारत 5.140.16
ब्रूयाः कर्ण इतो गत्वा द्रोणं शांतनवं कृपम्सौम्योऽयं वर्तते मासः सुप्रापयवसेन्धनः
brūyāḥ karṇa ito gatvā droṇaṃ śāṃtanavaṃ kṛpamsaumyo'yaṃ vartate māsaḥ suprāpayavasendhanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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