महाभारत 5.140.8
यदा द्रक्ष्यसि संग्रामे कुन्तीपुत्रं युधिष्ठिरम्जपहोमसमायुक्तं स्वां रक्षन्तं महाचमूम्
yadā drakṣyasi saṃgrāme kuntīputraṃ yudhiṣṭhiramjapahomasamāyuktaṃ svāṃ rakṣantaṃ mahācamūm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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