महाभारत 5.141.10
सोमस्य लक्ष्म व्यावृत्तं राहुरर्कमुपेष्यतिदिवश्चोल्काः पतन्त्येताः सनिर्घाताः सकम्पनाः
somasya lakṣma vyāvṛttaṃ rāhurarkamupeṣyatidivaścolkāḥ patantyetāḥ sanirghātāḥ sakampanāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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