महाभारत 5.141.32
उच्चं पर्वतमारूढो भीमकर्मा वृकोदरःगदापाणिर्नरव्याघ्रो वीक्षन्निव महीमिमाम्
uccaṃ parvatamārūḍho bhīmakarmā vṛkodaraḥgadāpāṇirnaravyāghro vīkṣanniva mahīmimām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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