महाभारत 5.142.3
उपपन्नो ह्यसौ राजा चेदिपाञ्चालकेकयैःभीमार्जुनाभ्यां कृष्णेन युयुधानयमैरपि
upapanno hyasau rājā cedipāñcālakekayaiḥbhīmārjunābhyāṃ kṛṣṇena yuyudhānayamairapi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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