महाभारत 5.144.22
न ते जातु नशिष्यन्ति पुत्राः पञ्च यशस्विनिनिरर्जुनाः सकर्णा वा सार्जुना वा हते मयि
na te jātu naśiṣyanti putrāḥ pañca yaśasvininirarjunāḥ sakarṇā vā sārjunā vā hate mayi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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