महाभारत 5.145.14
मया वै श्राविते वाक्ये जहास धृतराष्ट्रजःअथ भीष्मः सुसंक्रुद्ध इदं वचनमब्रवीत्
mayā vai śrāvite vākye jahāsa dhṛtarāṣṭrajaḥatha bhīṣmaḥ susaṃkruddha idaṃ vacanamabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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