महाभारत 5.145.18
न चोच्छेदं कुलं यायाद्विस्तीर्येत कथं यशःतस्याहमीप्सितं बुद्ध्वा कालीं मातरमावहम्
na cocchedaṃ kulaṃ yāyādvistīryeta kathaṃ yaśaḥtasyāhamīpsitaṃ buddhvā kālīṃ mātaramāvaham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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