महाभारत 5.145.34एवं तामनुनीयाहं मातरं जनमेव चअयाचं भ्रातृदारेषु तदा व्यासं महामुनिम्evaṃ tāmanunīyāhaṃ mātaraṃ janameva caayācaṃ bhrātṛdāreṣu tadā vyāsaṃ mahāmunimइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें