महाभारत 5.146.5
ततः सिंहासने राजन्स्थापयित्वैनमच्युतम्वनं जगाम कौरव्यो भार्याभ्यां सहितोऽनघ
tataḥ siṃhāsane rājansthāpayitvainamacyutamvanaṃ jagāma kauravyo bhāryābhyāṃ sahito'nagha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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