महाभारत 5.147.3
सोमः प्रजापतिः पूर्वं कुरूणां वंशवर्धनःसोमाद्बभूव षष्ठो वै ययातिर्नहुषात्मजः
somaḥ prajāpatiḥ pūrvaṃ kurūṇāṃ vaṃśavardhanaḥsomādbabhūva ṣaṣṭho vai yayātirnahuṣātmajaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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