महाभारत 5.149.26यमदूतसमान्वेगे निपाते पावकोपमान्रामेणाजौ विषहितान्वज्रनिष्पेषदारुणान्yamadūtasamānvege nipāte pāvakopamānrāmeṇājau viṣahitānvajraniṣpeṣadāruṇānइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें