महाभारत 5.149.28
क्षिप्रहस्तश्चित्रयोधी मतः सेनापतिर्ममअभेद्यकवचः श्रीमान्मातङ्ग इव यूथपः
kṣiprahastaścitrayodhī mataḥ senāpatirmamaabhedyakavacaḥ śrīmānmātaṅga iva yūthapaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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