महाभारत 5.149.54
फल्गु यच्च बलं किंचित्तथैव कृशदुर्बलम्तत्संगृह्य ययौ राजा ये चापि परिचारकाः
phalgu yacca balaṃ kiṃcittathaiva kṛśadurbalamtatsaṃgṛhya yayau rājā ye cāpi paricārakāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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