महाभारत 5.149.68परिहृत्य श्मशानानि देवतायतनानि चआश्रमांश्च महर्षीणां तीर्थान्यायतनानि चparihṛtya śmaśānāni devatāyatanāni caāśramāṃśca maharṣīṇāṃ tīrthānyāyatanāni caइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें