महाभारत 5.149.7
सप्तानामपि यो नेता सेनानां प्रविभागवित्यः सहेत रणे भीष्मं शरार्चिःपावकोपमम्
saptānāmapi yo netā senānāṃ pravibhāgavityaḥ saheta raṇe bhīṣmaṃ śarārciḥpāvakopamam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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