महाभारत 5.149.83
निविष्टान्पाण्डवांस्तत्र ज्ञात्वा मित्राणि भारतअभिसस्रुर्यथोद्देशं सबलाः सहवाहनाः
niviṣṭānpāṇḍavāṃstatra jñātvā mitrāṇi bhārataabhisasruryathoddeśaṃ sabalāḥ sahavāhanāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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