महाभारत 5.15.1
शल्य उवाच · śalya uvāca
एवमुक्तः स भगवाञ्शच्या पुनरथाब्रवीत्विक्रमस्य न कालोऽयं नहुषो बलवत्तरः
evamuktaḥ sa bhagavāñśacyā punarathābravītvikramasya na kālo'yaṃ nahuṣo balavattaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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