महाभारत 5.150.12विराटद्रुपदौ चैव कृतवैरौ मया सहतौ च सेनाप्रणेतारौ वासुदेववशानुगौvirāṭadrupadau caiva kṛtavairau mayā sahatau ca senāpraṇetārau vāsudevavaśānugauइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें