महाभारत 5.153.10
एवं ये कुशलं शूरं हिते स्थितमकल्मषम्सेनापतिं प्रकुर्वन्ति ते जयन्ति रणे रिपून्
evaṃ ye kuśalaṃ śūraṃ hite sthitamakalmaṣamsenāpatiṃ prakurvanti te jayanti raṇe ripūn
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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