महाभारत 5.153.20
अहं स च क्षणेनैव निर्मनुष्यमिदं जगत्कुर्यां शस्त्रबलेनैव ससुरासुरराक्षसम्
ahaṃ sa ca kṣaṇenaiva nirmanuṣyamidaṃ jagatkuryāṃ śastrabalenaiva sasurāsurarākṣasam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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