महाभारत 5.153.23
सेनापतिस्त्वहं राजन्समयेनापरेण तेभविष्यामि यथाकामं तन्मे श्रोतुमिहार्हसि
senāpatistvahaṃ rājansamayenāpareṇa tebhaviṣyāmi yathākāmaṃ tanme śrotumihārhasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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