महाभारत 5.153.2ऋते सेनाप्रणेतारं पृतना सुमहत्यपिदीर्यते युद्धमासाद्य पिपीलिकपुटं यथाṛte senāpraṇetāraṃ pṛtanā sumahatyapidīryate yuddhamāsādya pipīlikapuṭaṃ yathāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें