महाभारत 5.154.20
गाण्डीवधन्वा ये चान्ये राजानस्तत्र केचनपूजयां चक्रुरभ्येत्य ते स्म सर्वे हलायुधम्
gāṇḍīvadhanvā ye cānye rājānastatra kecanapūjayāṃ cakrurabhyetya te sma sarve halāyudham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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