महाभारत 5.155.26
तथा प्रतिभये तस्मिन्देवदानवसंकुलेखाण्डवे युध्यमानस्य कः सहायस्तदाभवत्
tathā pratibhaye tasmindevadānavasaṃkulekhāṇḍave yudhyamānasya kaḥ sahāyastadābhavat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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