महाभारत 5.155.4
यो माहेन्द्रं धनुर्लेभे तुल्यं गाण्डीवतेजसाशार्ङ्गेण च महाबाहुः संमितं दिव्यमक्षयम्
yo māhendraṃ dhanurlebhe tulyaṃ gāṇḍīvatejasāśārṅgeṇa ca mahābāhuḥ saṃmitaṃ divyamakṣayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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