महाभारत 5.16.14
महासुरो हतः शक्र नमुचिर्दारुणस्त्वयाशम्बरश्च बलश्चैव तथोभौ घोरविक्रमौ
mahāsuro hataḥ śakra namucirdāruṇastvayāśambaraśca balaścaiva tathobhau ghoravikramau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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