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महाभारत 5.16.30
ते चाब्रुवन्नहुषो घोररूपो; दृष्टीविषस्तस्य बिभीम देवत्वं चेद्राजन्नहुषं पराजये;स्तद्वै वयं भागमर्हाम शक्र
te cābruvannahuṣo ghorarūpo; dṛṣṭīviṣastasya bibhīma devatvaṃ cedrājannahuṣaṃ parājaye;stadvai vayaṃ bhāgamarhāma śakra
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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