महाभारत 5.163.3एतस्य रथवंशो हि तिग्मवेगप्रहारिणाम्काम्बोजानां महाराज शलभानामिवायतिःetasya rathavaṃśo hi tigmavegaprahāriṇāmkāmbojānāṃ mahārāja śalabhānāmivāyatiḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें