महाभारत 5.163.4नीलो माहिष्मतीवासी नीलवर्मधरस्तवरथवंशेन शत्रूणां कदनं वै करिष्यतिnīlo māhiṣmatīvāsī nīlavarmadharastavarathavaṃśena śatrūṇāṃ kadanaṃ vai kariṣyatiइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें