महाभारत 5.164.32
एष चारिषु विक्रान्तः कर्म सत्पुरुषोचितम्कर्ता विमर्दे सुमहत्त्वदर्थे पुरुषोत्तमः
eṣa cāriṣu vikrāntaḥ karma satpuruṣocitamkartā vimarde sumahattvadarthe puruṣottamaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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