महाभारत 5.164.37ततः सखायं गान्धारे मानयन्पाकशासनम्अकरोत्संविदं तेन पाण्डवेन महात्मनाtataḥ sakhāyaṃ gāndhāre mānayanpākaśāsanamakarotsaṃvidaṃ tena pāṇḍavena mahātmanāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें