महाभारत 5.166.16
स्वयं राजा रथोदारः पाण्डवः कुन्तिनन्दनःअग्निवत्समरे तात चरिष्यति न संशयः
svayaṃ rājā rathodāraḥ pāṇḍavaḥ kuntinandanaḥagnivatsamare tāta cariṣyati na saṃśayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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