महाभारत 5.166.21
सिंहसंहननाः सर्वे पाण्डुपुत्रा महाबलाःचरितब्रह्मचर्याश्च सर्वे चातितपस्विनः
siṃhasaṃhananāḥ sarve pāṇḍuputrā mahābalāḥcaritabrahmacaryāśca sarve cātitapasvinaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें