महाभारत 5.166.24
जवे लक्ष्यस्य हरणे भोज्ये पांसुविकर्षणेबालैरपि भवन्तस्तैः सर्व एव विशेषिताः
jave lakṣyasya haraṇe bhojye pāṃsuvikarṣaṇebālairapi bhavantastaiḥ sarva eva viśeṣitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें