महाभारत 5.166.32
अभेद्यं कवचं दिव्यमक्षय्यौ च महेषुधीअस्त्रग्रामश्च माहेन्द्रो रौद्रः कौबेर एव च
abhedyaṃ kavacaṃ divyamakṣayyau ca maheṣudhīastragrāmaśca māhendro raudraḥ kaubera eva ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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