महाभारत 5.166.4
जामदग्न्येन रामेण महास्त्राणि प्रमुञ्चतान मे व्यथाभवत्काचित्त्वं तु मे किं करिष्यसि
jāmadagnyena rāmeṇa mahāstrāṇi pramuñcatāna me vyathābhavatkācittvaṃ tu me kiṃ kariṣyasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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