महाभारत 5.166.6
समेतं पार्थिवं क्षत्रं काशिराज्ञः स्वयंवरेनिर्जित्यैकरथेनैव यत्कन्यास्तरसा हृताः
sametaṃ pārthivaṃ kṣatraṃ kāśirājñaḥ svayaṃvarenirjityaikarathenaiva yatkanyāstarasā hṛtāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें