महाभारत 5.169.11
तैरहं समरे वीर त्वामायद्भिर्जयैषिभिःयोत्स्यामि जयमाकाङ्क्षन्नथ वा निधनं रणे
tairahaṃ samare vīra tvāmāyadbhirjayaiṣibhiḥyotsyāmi jayamākāṅkṣannatha vā nidhanaṃ raṇe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें