महाभारत 5.176.2
यदि सौभपतिर्भद्रे नियोक्तव्यो मते तवनियोक्ष्यति महात्मा तं रामस्त्वद्धितकाम्यया
yadi saubhapatirbhadre niyoktavyo mate tavaniyokṣyati mahātmā taṃ rāmastvaddhitakāmyayā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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