महाभारत 5.176.33
न चेत्करिष्यति वचो मयोक्तं जाह्नवीसुतःधक्ष्याम्येनं रणे भद्रे सामात्यं शस्त्रतेजसा
na cetkariṣyati vaco mayoktaṃ jāhnavīsutaḥdhakṣyāmyenaṃ raṇe bhadre sāmātyaṃ śastratejasā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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