महाभारत 5.176.36
सौभराजमुपेत्याहमब्रुवं दुर्वचं वचःन च मां प्रत्यगृह्णात्स चारित्रपरिशङ्कितः
saubharājamupetyāhamabruvaṃ durvacaṃ vacaḥna ca māṃ pratyagṛhṇātsa cāritrapariśaṅkitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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