महाभारत 5.176.38
ममात्र व्यसनस्यास्य भीष्मो मूलं महाव्रतःयेनाहं वशमानीता समुत्क्षिप्य बलात्तदा
mamātra vyasanasyāsya bhīṣmo mūlaṃ mahāvrataḥyenāhaṃ vaśamānītā samutkṣipya balāttadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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