महाभारत 5.178.33
स गच्छ विनिवर्तस्व कुरुक्षेत्रं रणप्रियतत्रैष्यामि महाबाहो युद्धाय त्वां तपोधन
sa gaccha vinivartasva kurukṣetraṃ raṇapriyatatraiṣyāmi mahābāho yuddhāya tvāṃ tapodhana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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