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महाभारत 5.178.35
तत्र गच्छस्व राम त्वं त्वरितं युद्धदुर्मदव्यपनेष्यामि ते दर्पं पौराणं ब्राह्मणब्रुव
tatra gacchasva rāma tvaṃ tvaritaṃ yuddhadurmadavyapaneṣyāmi te darpaṃ paurāṇaṃ brāhmaṇabruva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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