महाभारत 5.178.4
स मामभिगतं दृष्ट्वा जामदग्न्यः प्रतापवान्प्रतिजग्राह तां पूजां वचनं चेदमब्रवीत्
sa māmabhigataṃ dṛṣṭvā jāmadagnyaḥ pratāpavānpratijagrāha tāṃ pūjāṃ vacanaṃ cedamabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें