महाभारत 5.178.7
प्रत्याख्याता हि शाल्वेन त्वया नीतेति भारततस्मादिमां मन्नियोगात्प्रतिगृह्णीष्व भारत
pratyākhyātā hi śālvena tvayā nīteti bhāratatasmādimāṃ manniyogātpratigṛhṇīṣva bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें