महाभारत 5.178.8
स्वधर्मं पुरुषव्याघ्र राजपुत्री लभत्वियम्न युक्तमवमानोऽयं कर्तुं राज्ञा त्वयानघ
svadharmaṃ puruṣavyāghra rājaputrī labhatviyamna yuktamavamāno'yaṃ kartuṃ rājñā tvayānagha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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